शक्ति (Power)
समस्त गति, सभी सम्बन्ध, सभी प्रक्रियाएं, समस्त व्यवस्था तथा प्रकृति में घटने वाली प्रत्येक घटना शक्ति की अभिव्यक्ति है।
पैरेटो, मैक्स वेबर आदि ने शक्ति को सामाजिक स्तरीकरण का एक प्रमुख आधार माना है।
लार्ड ऐक्टन ने कहा है कि "शक्ति भ्रष्ट करती है तथा पूर्ण शक्ति पूर्णतया भ्रष्ट कर देती है ।"(Power corrupts and absolute power corrupts absolutely.)
सामुदायिक शक्ति की अवधारणा को टालकट पारसन्स ने दिया है।
शक्ति की शुन्य योग (Zero sum) की अवधारणा को दी है।
मैक्स वेबर को शक्ति के राजनैतिक प्रयोग के कारण राजनैतिक निर्धारणवादी कहा जाता है।
शक्ति की परिवर्तनशील योग या सकारात्मक योग की अवधारणा को पारसन्स ने दिया है।
पारसन्स ने शक्ति को संसाधन के रूप में परिभाषित किया है।
Definitions :-
1. "दुसरो की क्रियाओं को नियंत्रित करने की क्षमता को शक्ति कहते है "
- हार्टन और हंट
2. "सामान्यतः हम शक्ति को व्यक्ति अथवा कई लोगो द्वारा अपनी इच्छाओं को दूसरों पर थोपने अथवा दूसरों द्वारा प्रतिरोध करने पर भी पूर्ण करने को कहते है। " अर्थात
"किसी व्यक्ति की वह क्षमता जिससे वह अपनी इच्छाओं को अन्य व्यक्तियों पर आरोपित करता है। "
- मैक्स वेबर
3. "शक्ति सामाजिक व्यवस्था की एक ऐसी सामान्यकृत क्षमता है जिसका उद्देश्य सामूहिक हितों के लक्ष्यों को पूर्ण करना होता है "
- टालकाट पारसन्स
4. "शक्ति बल प्रयोग की क्षमता है न कि उसका वास्तविक प्रयोग "
- बीरस्टीड
"शक्ति व्यक्तियों या व्यवहारों को नियंत्रित करने या नियमित करने या निर्देशित करने की क्षमता है। " - मैकाइवर
"एक व्यक्ति को उतना ही शक्तिशाली कहा जाता है जितना कि वह अपने लक्ष्यों के अनुरूप दूसरों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। "
- गोल्ड हैमर
विशेषताएं :-
1. शक्ति के लिए या शक्ति के प्रयोग के लिए व्यक्तियों का होना आवश्यक है।
2. शक्ति दुसरो के द्वारा प्रतिरोध करने पर भी सफल होती है।
3. शक्ति का अपना कोई न कोई उद्देश्य होता है।
4. शक्ति को संगठित और सुदृढ़ किया जाता है न कि अर्जित किया जाता है।
5. शक्ति मानवीय क्षमता का ही नाम है।
6. शक्ति सभी मानवीय समाजो में पायी जाती है।
7. शक्ति के अनेक रूप हो सकते है - सत्ता, प्रभाव, दबाव।
8. शक्ति तभी लम्बे समय तक रहती है जब वो औचित्य पूर्ण सामूहिक हित में हो।
शक्ति के स्रोत या आधार :-
1. ज्ञान Knowledge) - ज्ञान शक्ति का प्रथम स्रोत ह।
2. संगठन (Organization) - संगठन ही शक्ति है।
3. आत्मविश्वास (self-confidence) - शक्ति का ही एक प्रमुख आधार है।
4. प्राप्तियां व उपलब्धियां (Possessions and Achievement)
5. परिस्थितियां (Circumstances) - लेनिन, हिटलर, मुसोलिनी
6. आकर(Form) - जैसे समाज में होने वाले सभी प्रकार के आंदोलन।
7. सत्ता (Authority) यह एक वैद्यानिक शक्ति होती है।
8. विचारों एवं कार्यों (Ideology and Action) - गाँधी के विचार, मंडेला के विचार, तिलक के विचार।
शक्ति के प्रकार :-
मैक्स वेबर शक्ति के चार प्रकारों की बात करता है: –
1. दमन (Coercion) - जब कोई व्यक्ति अनौचित्यपूर्ण ढंग से शक्ति का प्रयोग करता है - आंदोलन को दमन करना।
2. वैद्यानिक शक्ति (Legal Power)- जब कोई व्यक्ति अपनी शक्ति का प्रयोग वैद्यानिक ढंग से करता है - IAS ,PCS ,IPS
3. परम्परागत शक्ति (Traditional Power)- जब किसी व्यक्ति को शक्ति की प्राप्ति किसी परम्परागत आधार पर होती है - राजा, पंचायत
4. करिश्माई शक्ति (Charismatic Power)- जब किसी व्यक्ति को शक्ति उस व्यक्ति के विशिष्ठ विशेषताओ।, विश्वासों आदि के कारण प्राप्त होती है- महात्मा गाँधी, जय प्रकाश नारायण, लोकमान्य तिलक,
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