Friday, June 23, 2023

Kinship System – नातेदारी व्यवस्था:-

Kinship System – नातेदारी व्यवस्था:-

नातेदारी व्यवस्था:-

परिभाषाएं :-

·      “ नातेदारी व्यवस्था में समाज द्वारा मान्यता प्राप्त वे सम्बन्ध आ सकते है जो कि अनुमानित एवं वास्तविक वंशावली संबंधों पर आधारित हो. “- चार्ल्स विनिक

·      "  नातेदारी सामाजिक उद्देश्यों के लिए स्वीकृत वंश सम्बन्ध है जो कि सामाजिक संबंधसम, परम्परात्मक संबंधों का आधार है. “  – रेडक्लिफ ब्राउन

·      " नातेदारी वंशावलियों के माध्यम से निर्धारित एवं वर्णित की जाती है. “ – W.H.R. रिवर्स

 

नातेदारी के प्रकार -

हालैंड के अनुसार –

1.     विवाह सम्बन्धी नातेदारी

2.     रक्त सम्बन्धी नातेदारी

3.     विस्तृत नातेदारी

रेडक्लिफ ब्राउन के अनुसार –

1.     विवाह सम्बन्धी – पति- पत्नी, सास-श्वसुर, साला

2.     रक्त सम्बन्धी – माता, पिता, भाई, बहन, संतान

क्रच व क्रच फिल्ड के अनुसार –

1.     उदण्ड नातेदारी

2.     समान्तर नातेदारी

3.     असमानांतर नातेदारी

इरावती कर्वे :-

          इन्होने भारत 4 नातेदारी क्षेत्रों में विभाजित किया है-

1.    उत्तर भारत में नातेदारी व्यवस्था – सिन्धी, पंजाबी, हिंदी, बिहारी, बंगाली, असामी व नेपाली भाषी क्षेत्र शामिल है. इनमे अन्तः विवाह, गोत्र बहिर्विवाह होती है .

2.    केन्द्रीय भारत में नातेदारी व्यवस्था – राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र उड़ीसा आदि राज्य .

3.    दक्षिण भारत में नातेदारी व्यवस्था – कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और लक्षद्वीप इनमे पितृवंशीय और मातृवंशीय

4.    पूर्वी भारत में नातेदारी व्यवस्था – पूर्वी भारत, छोटानागपुर का पठार 


नातेदारी की श्रेणियां –

 G.P. मरडाक ने 250 समाजों का अध्ययन किया था . इन्होने नातेदारी की श्रेणी को तीन भागों में विभाजित किया है –

1.     प्राथमिक नातेदारी – इसमे कुल आठ नातेदार आते है – माता, पिता, भाई, बहन, पुत्र, पुत्री, पति, पत्नी .

2.     द्वितीयक नातेदारी – इसमे कुल 33 नातेदार आते है – चाचा, दादा, बुआ, मौसी, मामा, भतीजा, भतीजी ......

3.     तृतीय नातेदारी – इसमे कुल 151 नातेदार आते है – साला, साली, साढ़ू, सास, श्वसुर, देवर, देवरानी, .......

नातेदारी के नियामक :-

परिहार – यह अवधारणा E.B. टायलर के द्वारा दी गयी थी. कुछ सम्बन्धी आपस में एक-दुसरे से दूरी बनाये रखते है. भाई-बहन, जेठ-देवरानी, सास-दामाद, श्वसुर-पुत्रवधू .......

परिहास – परिहास की अवधारणा रेडक्लिफ ब्राउन के द्वारा दी गयी है. कुछ सम्बन्धी नातेदारी के मध्य हंसी, मजाक आदि होती है तथा एक-दूसरे को बुरा नहीं लगता है. जैसे- जीजा-साली, मामा-भांजा, देवर-भाभी, ननद-भाभी, मामी-भांजा आदि .

माध्यमिक सम्बोधन :-

इसका उल्लेख टायलर ने किया है. यह मातृसत्तात्मक परिवारों के कारण हुई है.

नातेदारी संबोध/संज्ञायें/शब्दावली :-

LH मार्गन ने नातेदारी संबंधों को 2 भागों में बाटा है –

1.    विशिष्ठ/वर्णनात्मक/ व्यक्तिकात्मक सम्बन्ध –

इसमे केवल उन्ही व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होते है जिनके सन्दर्भ में संबोधित करते हुए बात की जाती है. प्रत्येक व्यक्ति को उनके व्यक्तिगत नामो से जाना जाता है.

2.    वर्गात्मक सम्बन्ध बोधक -

इसमे एक वर्ग के सम्पूर्ण लोगों को पुकारने के लिए in शब्दों का उपयोग किया जाता है. जैसे – मौसी, मौसा, चाचा, चची, मामा, मामी. एक ही सम्बोधन के नाम से बहुत से व्यक्तियों को पुकारा जाता है.


 

Thursday, June 22, 2023

संयुक्त परिवार / विस्तृत परिवार – (Joint Family):-

 संयुक्त परिवार / विस्तृत परिवार – (Joint Family):-

 

संयुक्त परिवार :-

परिभाषाएं :-

“ एक संयुक्त परिवार उन व्यक्तियों का समूह है जो एक ही छत के निचे रहते है, जो एक रसोई में पका भोजन करते है, जो सामान्य संपत्ति के अधिकारी होते है,बजो सामान्य पूजा में भाग लेते है तथा जो परस्पर एक दूसरे से विशिष्ट नातेदारी से सम्बंधित है. “ – इरावती कर्वे

“ हम उस परिवार को संयुक्त परिवार कहते है जिसमे एकाकी परिवार की अपेक्षा अधिक पीढ़ियों के सदस्य सम्मिलित होते है और जो एक दुसरे से संपत्ति, आय और परस्पर अधिकारों तथा कर्तव्यों द्वारा बंधे होते है. “ –     आई पी देसाई

“ यदि अनेक मूल परिवार संयुक्त रूप में रहते हो, उनमे निकट का सम्बन्ध हो, वे एक ही स्थान पर बना भोजन करते हो तथा आर्थिक इकाई के रूप में कार्य करते हो तब उनके इस सम्मिलित रूप को एक संयुक्त परिवार कहा जा सकता है. “ – एस सी दुबे

संयुक्त परिवार की विशेषताएं :-

·      सामान्य निवास

·      सामान्य रसोई

·      सामान्य संपत्ति

·      सामान्य पूजा

·      बड़ा आकर

·      अधिकार और दायित्व

·      सहयोगी व्यवस्था

·      रक्त सम्बन्धी

·      निश्चित संस्तरण

संयुक्त परिवार के प्रकार :-

Joint family in  an urban setting (1961) - A. D. Ross - 

·      संयुक्त परिवार

·      लघु संयुक्त परिवार 

·      नाभिक परिवार

·      आश्रित युक्त  नाभिक परिवार

आई पी देसाई - 

·      एकल परिवार

·      प्रकार्यात्मक रूप से संयुक्त परिवार

·      प्रकार्यात्मक एवं धन के आधार पर संयुक्त परिवार

·      सीमांत संयुक्त परिवार

·      पारंपरिक संयुक्त परिवार 


के. एम. कपाड़िया के अनुसार –

1.      एक परिवार

2.      एक परिवार विवाहित पुत्रों के साथ

3.      एक रेखीय वंशज संयुक्त परिवार

4.      आश्रित व्यक्ति के साथ वाला एक परिवार

एम. एस. गोरे के अनुसार –

1.      संतानीय संयुक्त परिवार

2.      भ्रातृक संयुक्त परिवार

3.      संतानीय एवं भ्रातृक संयुक्त परिवार

पोलेन कोलेंडा के अनुसार –

परिवार –

1.      नाभिक परिवार

2.      संपूरक न्यामिक परिवार

3.      उप न्यामिक परिवार

4.      एक व्यक्ति परिवार

5.      संपूरक उप न्यामिक परिवार

संयुक्त परिवार –

1.      सगोत्र संयुक्त परिवार

2.      संपूरक सगोत्र संयुक्त परिवार

3.      वंशज संयुक्त परिवार

4.      संपूरक वंशज संयुक्त परिवार

5.      वंशज सगोत्र संयुक्त परिवार

6.      संपूरक वंशज सगोत्र संयुक्त परिवार

     ·      आदर्श रूप में परिवार एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक शांति गृह है, जहा प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षा पा सकता है. – सदरलैंड और वूडवर्ड

·      विवाह द्वारा बंधुता समूहों में सदस्य भर्ती किये जाते है. – लेवी स्ट्रास

·      परिवार का क़ानूनी आधार विवाह है. – लूसी मेयर

·      विवाह ही नातेदारी व्यवस्था का फाउन्टेनहेड है. – मैलिनोवास्की

·      नातेदारी ही सभी प्रकार के सामाजिक संबंधो का मूल स्रोत है. – LH मार्गन

·      पुरुष व स्त्रियों के बीच असमानता निजी संपत्ति से शुरू हुयी है. – एंजेल्स

·      माता-पिता और उनकी संतान परिवार के तीन आधारभूत स्तम्भ है. – मैलिनोवास्की

·      देवर-भाभी विवाह प्रथा सहोदर भाईयों में एकता की अभिव्यक्ति करता है. – मैलिनोवास्की

·      परिवार की मुख्य व्याधि एकाकी परिवार का अपने नातेदारी एवं वृद्ध समुदाय से पृथक हो जाना है. – टालकट परसंस

·      परिवार और विवाह एक पूरक अवधारणायें है विवाह एक संस्था है, तथा परिवार वह समिति है जिसमे संस्था सम्मिलित होती है. – वेस्टरमार्क

·      विवाह यौनाचार को नहीं बल्कि पितृत्व की लाइसेंस प्रदान करता है. – मैलिनोवास्की

·      परिवार बृहद सामाजिक संस्था की मौलिक सहयोगी आधारशीला है. – जी पी मरडाक

·       हिन्दू समाज की इकाई व्यक्ति न होकर संयुक्त परिवार है. – के एम पणिक्कर

·      यंयुक्त परिवार भारत की आदि परंपरा है. – मैक्स मूलर

·      जाति और संयुक्त परिवार हिन्दू सामाजिक संगठन के दो महत्वपूर्ण स्तम्भ है. – के एम पणिक्कर

·      संयुक्त परिवार का प्रमुख लक्षण पीढ़ियों की गहराई है. – के एम कपाडिया

·      परिवर्तनों के कारण संयुक्त परिवार विघटित हो आरहे है. – बर्गेस, डेविस, बोटोमोर

·      हिन्दू भावनाएं आज भी संयुक्त परिवार में है. – के एम कपाड़िया

कुछ महत्वपूर्ण पुसके:-

1.     Marriage and family in India (1955) – के एम कपाड़िया

2.     Hindu kinship (1947) – के एम कपाड़िया

3.     Family and kinship: a study of the rural Kashmir (1965) – टी एन मदान

4.     Some aspects of family in Mahua (1964) – आई पी देसाई

5.     Kinship organization in India (1953) – इरावती कर्वे

6.     Hindu society (1961) -   इरावती कर्वे 

 

Monday, June 19, 2023

Family – परिवार

परिवार - (Family) :-

·      परिवार समाजशास्त्र की अध्ययन की इकाई है.

·      परिवार मानव जीवन की पोषिका है – C.H. कूले

·      परिवार समाज की इकाई/कोशिका है – अगस्त काम्टे

·      परिवार वह झुला है जिसमे भविष्य का जन्म होता है - सिडनी ए. गोल्डस्टोन

·      परिवार वह शिशुगृह है जिसमे नए प्रजातंत्र का जन्म होता है - सिडनी ए. गोल्डस्टोन

·      परिवार ही एक ऐसा समूह है जिसे मनुष्य पशु अवस्था से अपने साथ लाया है – मैलिनोवास्की

परिवार की परिभाषाएं :-

·      “परिवार ऐसे व्यक्तियों का समूह है जिसमे सगोत्रता के सम्बन्ध होते है और जो इस प्रकार एक दुसरे के सम्बन्धी होते है.” – किंग्सले डेविस

·      “परिवार पति-पत्नी एवं बच्चो से निर्मित एक जैविक सामाजिक इकाई है.”– इलियट और मैरिल

·      “परिवार पर्याप्त निश्चित यौन सम्बन्ध द्वारा परिभाषित एक ऐसा समूह है जो बच्चों के जनन और लालन-पोषण की व्यवस्था करता है.” – मैकाइवर व पेज

·      “परिवार एक गृहस्थ समूह है जिसमे माता-पिता और संतान साथ-साथ रहते है. इसके मूलरूप में दंपत्ति और उसकी संतान रहती है.” – लूसी मेयर

·      “परिवार एक ऐसा सामाजिक समूह है जिसके लक्षण सामान्य निवास, आर्थिक सहयोग और जनन है.” – G.B. मरडाक  

परिवार की विशेषताएं :-

मैकाइवर व पेज के अनुसार –

1.      सार्वभौमिकता

2.      भावात्मक आधार

3.      सृजनात्मक प्रभाव

4.      सीमित आकार

5.      सदस्यों का उत्तरदायित्व

6.      सामाजिक नियंत्रण

7.      अस्थायी और स्थायी प्रकृति

8.      सामाजिक संरचना में केन्द्रीय स्थिति

मैरिल व एल्द्रिज़ के अनुसार –

1.      सार्वभौमिकता

2.      संवेगात्मक

3.      प्राथमिकता

4.      उत्तरदायित्व

5.      छोटा आकर

परिवार की उत्तपत्ति के सिद्धांत :-

1.    यौन साम्यवाद का सिद्धांत :- 

                                            इस सिद्धांत के मानने वालो में L.H. मार्गन, फ्रेज़र और ब्रिफल्ट है. समाज के प्रारंभिक अवस्था में परिवार और विवाह जैसी कोई संस्था नहीं थी. जो भी चाहे किसी से भी यौन सम्बन्ध स्थापित कर सकता था.

2.    पितृसत्तात्मक / शास्त्रीय सिद्धांत :- 

                                                        इस सिद्धांत को मानने वालो में प्लेटो, अरस्तू और सर हेनरी मेन है. सर्वप्रथम पितृसत्तात्मक परिवार ही विकसित हुए थे. परिवार की उत्तपत्ति पुरुषों की सत्ता के कारण हुयी है.

3.    मातृसत्तात्मक सिद्धांत :- 

                                        राबर्ट ब्रिफाल्ट – (book – The Mother) और टायलर . परिवार की उत्तपत्ति यौन सम्बन्ध और संतानोत्तपत्ति के बाद बच्चों का माता के द्वारा पालन-पोषण करने से हुई.

4.    उदविकासीय सिद्धांत :- 

                                        बैकोफन (Myth, religion and mother rights 1861) में अपने सिद्धांत को दिया जिसे बाद में LH मार्गन ने पुष्ट किया. परिवार का जन्म विकास की विभिन्न अवस्थाओं से हुआ है-

बैकोफन के अनुसार –

1.      यौन साम्यवाद

2.      कन्याबध व बहुपति विवाह

3.      बहुपत्नी विवाह

4.      एक विवाही प्रथा का विकास

LH मार्गन के अनुसार -

1.      समरक्त परिवार

2.      समूह परिवार

3.      सिन्देस्मियन परिवार

4.      पितृसत्तात्मक परिवार

5.      एक विवाही परिवार

5.  एक विवाही परिवार का सिद्धांत :- 

                                                    इस सिद्धांत के संपादक वेस्टरमार्क और मैलिनोवस्की है. परिवार की उत्तपत्ति एक विवाह के आधार पर ही हुयी है .

·      एक विवाह ही विवाह का सच्चा स्वरूप है, रहा है,और रहेगा. – मैलिनोवस्की

परिवार के प्रकार :-

               ·       पिता-

o   पितृसत्तात्मक परिवार – हिन्दू

o   पितृवंशीय परिवार – हिन्दू

o   पितृनामी परिवार –

o   पितृस्थानीय परिवारम -  हिन्दू, भील, खरिया

·      माता-  

o   मातृसत्तात्मक परिवार

o   मातृवंशीय परिवार

o   मातृनामी परिवार

o   मातृस्थानीय परिवार

·      संख्यां-

o   मूल या केन्द्रीय परिवार

o   संयुक्त या विस्तृत परिवार :- सामान्य संपत्ति, सामान्य संस्कृति और सामान्य निवास

§  मिताक्षरा संयुक्त परिवार

§  दायभाग संयुक्त परिवार

§  विस्तृत संयुक्त परिवार

·      विवाह-

o   एक विवाही परिवार

o   बहुविवाही परिवार :-

§  बहु पति विवाह – टोडा, खास, नायर,

§  बहु पत्नी विवाह – नागा, गोंड, बैंगा

राल्फ लिंटन के अनुसार –

o   विवाह सम्बन्धी परिवार

o   रक्त सम्बन्धी परिवार

W.L. वार्नर के अनुसार –

o   जन्म मूलक परिवार

o   प्रजनन मूलक परिवार

जिमर मैन के अनुसार –

o   न्यासिता परिवार

o   अति लघु परिवार

o   घरेलू परिवार

बर्गेस और लाक के अनुसार –

o   संस्थागत परिवार

o   साहचर्य परिवार

लिप्ले के अनुसार –

o   स्तम्भ परिवार

o   पितृ सत्तात्मक परिवार

o   अस्थाई परिवार

o   विशिष्टीकृत परिवार

यंग और विलमोट के अनुसार –

o   सममितिक / प्रतिशय परिवार

o   समन्वयवादी परिवार

G. B. मरडोक के अनुसार –

o   मातृ स्थानीय परिवार

o   पितृ स्थानीय परिवार

o   मातृ-पितृ स्थानीय परिवार

o   नव स्थानीय परिवार

o   मातुल स्थानीय परिवार

S.C. दुबे के अनुसार –

o   पितृ स्थानीय परिवार

o   मातृ स्थानीय परिवार

o   नव स्थानीय परिवार 

 

परिवार के प्रकार्य :-

जार्ज पीटर मरडाक के अनुसार –

          इन्होने 250 परिवारों का अध्ययन किया था . परिवार एक सार्वभौमिक संस्था है.

1.    यौन सम्बन्धी कार्य

2.    प्रजनन सम्बन्धी कार्य

3.    आर्थिक सम्बन्धी कार्य

4.    शैक्षिक सम्बन्धी कार्य

आगबर्न व निमकाफ के अनुसार –

1.      स्नेह व प्रेम सम्बन्धी कार्य

2.      आर्थिक कार्य

3.      मनोरंजन कार्य

4.      पालन-पोषण

5.      धार्मिक कार्य

6.      शिक्षा सम्बन्धी कार्य

राबर्ट बीरस्टीड के अनुसार –

1.      जीवन व अस्तित्व

2.      यौन अवसर प्रदान करना

3.      संरक्षण तथा समर्थन देना

4.      समाजीकरण

5.      पद प्रदान करना

टालकट परसन्स के अनुसार –

“आधारभूत व अपरिवर्तनीय प्रकार्य “

परिवार वह कारखाना है जहा व्यक्तित्व का उत्पादन होता है .

1.      बच्चों का प्राथमिक समाजीकरण

2.      व्यक्तित्व का स्थिरीकरण

मैकाइवर व पेज के अनुसार –

1.       यौन सम्बन्धी प्रकार्य

2.      प्रजनन सम्बन्धी प्रकार्य

3.      पालन-पोषण / आर्थिक प्रकार्य

हरबर्ट स्पेंसर के अनुसार –

1.      यौन व्यवहार व प्रजनन प्रक्रिया का नियमन

2.      समाजीकरण

3.      सुरक्षा

4.      स्नेह

R.S. लोबी के अनुसार –

1.      यौन सम्बन्ध

2.      आर्थिक

3.      प्रजनन

4.      शिक्षा

किंग्सले डेविस के अनुसार –

1.      प्रजनन

2.      बच्चों की देख-रेख

3.      नियोजन 

4.      समाजीकरण 


·      परिवार एक भूमिका सौदेबाजी है. – विलियम गुडे

·      पति-पत्नी आपस में झगड़ते है और बच्चें विद्रोही तेवर अपनाते है. – एडमंड लीच

·      वर्त्तमान औद्योगिक समाज में परिवार संघर्ष का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. – एडमंड लीच

·      परिवार शोषणकारी समाज में एक वैचारिकी अनुकूलन का कार्य करती है. – डेविड कूपर

·      एकान्तिक नाभिक परिवार – टालकट परसन्स

·      यह संरचनात्मक अलगावीकृत होता है. – टालकट परसंस

·      यह अमेरिका के औद्योगिक समाज में परिवार है. - टालकट परसन्स

·      परिवार पूंजीवादी समाज का अवलंबन है. – कार्ल मार्क्स

·      परिवार एक दमनकारी संस्था है. – वेस्टरमार्क

·      एक स्त्री परिवार की अंतिम बिंदु होती है. – सर हेनरी मेन

·      यदि परिवार मनुष्य की प्राणीशास्त्रीय आवश्यकताओं की समुचित व्यवस्था न करे तो समाज का अस्तित्व मिट जायेगा. – विलियम गूडे

·      परिवार का जन्म पुरुष के आधिपत्य और इर्ष्या की भावना के कारण हुई है. – चार्ल्स डार्विन

·      मार्गन की सम्पूर्ण परिवार की संरचना पानी की एक लकीर है. – N.W. थामस 



 महत्वपूर्ण पुस्तकें :-

·      Marriage and family (1947) – M.F. निमकाफ

·      The mothers (1927) – ब्रिफाल्ट

·      Family and civilization (1947) – C.C. जिमरमैन

·      The family encounters depression – R.C. एंजेल्स

·      The family (1945) – बर्गेस व लाक

·      The family (1964) – विलियम गूडे

·      History of human marriage – वेस्टरमार्क 

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