Conflict Theory of Social Change- सामाजिक परिवर्तन का संघर्षवादी
सिद्धांत:-
हिगेल, कार्ल
मार्क्स, A W स्माल, लेविस A. कोजर, राल्फ डाहरेनडार्फ आदि संघर्षवादी सामाजिक
परिवर्तन के प्रमुख समाजशास्त्रीय है.
प्रमुख संघर्षवादी सिद्धांत:-
GWF हीगेल (1770-1831):-
- द्वंद्ववाद
- वाद एवं प्रतिवाद (Thesis and Antithesis)
- समाज में द्वंद्व मानव मस्तिष्क की चेतना से उत्तपन्न होती है.
- जिस समाज में जैसी चेतना होगी वैसी ही समाज होगी.
कार्ल मार्क्स (1818-1883):-
- द्वंद्व का आधार वास्तु है न कि चेतना .
- समाज में द्वंद्व भौतिक वस्तुओं से उत्त्पन्न होती है.
- समाज में जिस प्रकार की भौतिक वस्तुएं होंगी उसी प्रकार की वह समाज होगी.
- “मैंने हीगेल के द्वंद्ववाद को सिर (चेतना/मस्तिष्क) के बल खड़ा पाया और मैंने उसे पैरों(भौतिक वस्तुएं ) के बल खड़ा कर दिया.”
- पूंजीपतियों में मिथ्या वर्ग चेतना होती है.
- आर्थिक निर्धारणवाद के आधार पर समाज में परिवर्तन की व्याख्या किया.
- “अभी तक के सभी समाजों का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास रहा है.”
- पूंजीपति(have) और मजदुर/ श्रमिक(have not) (सर्वहारा वर्ग)
- सामाजिक संरचना के प्रमुख दो तत्व होते है.-
- अधि संरचना (super structure)- इसके अंतर्गत कानून, धर्म,संस्कृति,सरकार,परिवार,दर्शन, शिक्षा, राजनीति आदि आते है.
- आधार भूत संरचना (Sub structure/ basic structure/ infrastructure)- इसके अंतर्गत श्रम,भूमि, पूंजी, तकनीकी,उत्पादन की प्रकिया/प्रणाली, उत्पादन के साधन, उत्पादन के सम्बन्ध आदि आते है.
AW स्माल (1854-1926):-
- समाज में संघर्ष का आधार व्यक्तिगत स्वार्थ है.
- स्वार्थ मानव की क्रियाशीलता का सबसे आसन आधार है.
- व्यक्तिगत स्वार्थ –
1.
स्वास्थ्य स्वार्थ
2.
संपत्ति स्वार्थ
3.
प्रतिष्ठा स्वार्थ
4.
ज्ञान स्वार्थ
5.
सुन्दरता स्वार्थ
6.
अधिकार स्वार्थ
- समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज संघर्ष से शांति (Pacification) की ओर बढाता है.
लेविस A कोजर (1913-2003):-
- Book- The Functions of social conflict – 1956
- समाज में संघर्ष दो प्रकार की होती है-
1. संगठनात्मक
2. विघटनात्मक
·
वास्तविक संघर्ष- यथार्थवादी
·
अवास्तविक संघर्ष – यथार्थवादी
- समाज में संघर्ष का प्रमुख कारण स्वार्थों की टकराहट है.
- स्वार्थ का स्वरुप – आर्थिक, रजनीतिक, सामाजिक कुछ भी हो सकती है.
- संघर्ष समाज में सुरक्षा कवच (Safety Valve) का कार्य करता है.
राल्फ डाहरेनडार्फ (1929-):-
- Book- class and class conflict in industrial society.
- सामाजिक व्यवस्था का आधार शक्ति का सोपानक्रम है.
- समाज में एकरूपता एवं अनुरूपता उत्पीडन से पैदा होती है.
- समाज शक्ति एवं सत्ता पर आधारित होती है.
- समाज में संघर्ष का आधार आर्थिक नहीं रजनीतिक है.
- समाज में व्यक्ति अपने स्वार्थ की पूर्ति सत्ता के द्वारा करता है.जिसे उत्पीडन का सिद्धांत (theory of coercion)कहते है.
- इनके सिद्धांत में सत्ता की संरचना है-
1. शासन(domination) – सत्ता का दुरूपयोग
2. दमन (subjection)
- इन दोनों के कारण समाज में संघर्ष की परिणिति होती है.
- सत्ता का असमान वितरण ही संघर्ष का मूल स्रोत है.
- “ सहयोग भी एक तरह की प्रतियोगिता ही है.” -- ES Bogardus.
- “परिवर्तन द्वंद्व से नहीं बल्कि समझौता से अता है.” – PS कोहेन
- “संघर्ष गतिरोध पैदा कर सकता है, परिवर्तन नहीं. “ – PS कोहेन
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