संयुक्त परिवार / विस्तृत परिवार – (Joint Family):-
संयुक्त परिवार :-
परिभाषाएं :-
“ एक संयुक्त परिवार उन व्यक्तियों का समूह है जो एक ही छत के निचे रहते है, जो एक रसोई में पका भोजन करते है, जो सामान्य संपत्ति के अधिकारी होते है,बजो सामान्य पूजा में भाग लेते है तथा जो परस्पर एक दूसरे से विशिष्ट नातेदारी से सम्बंधित है. “ – इरावती कर्वे
“ हम उस परिवार को संयुक्त परिवार कहते है जिसमे एकाकी परिवार की अपेक्षा अधिक पीढ़ियों के सदस्य सम्मिलित होते है और जो एक दुसरे से संपत्ति, आय और परस्पर अधिकारों तथा कर्तव्यों द्वारा बंधे होते है. “ – आई पी देसाई
“ यदि अनेक मूल परिवार संयुक्त रूप में रहते हो, उनमे निकट का सम्बन्ध हो, वे एक ही स्थान पर बना भोजन करते हो तथा आर्थिक इकाई के रूप में कार्य करते हो तब उनके इस सम्मिलित रूप को एक संयुक्त परिवार कहा जा सकता है. “ – एस सी दुबे
संयुक्त परिवार की विशेषताएं :-
· सामान्य निवास
· सामान्य रसोई
· सामान्य संपत्ति
· सामान्य पूजा
· बड़ा आकर
· अधिकार और दायित्व
· सहयोगी व्यवस्था
· रक्त सम्बन्धी
· निश्चित संस्तरण
संयुक्त परिवार के प्रकार :-
Joint family in an urban setting (1961) - A. D. Ross -
· संयुक्त परिवार
· लघु संयुक्त परिवार
· नाभिक परिवार
· आश्रित युक्त नाभिक परिवार
आई पी देसाई -
· एकल परिवार
· प्रकार्यात्मक रूप से संयुक्त परिवार
· प्रकार्यात्मक एवं धन के आधार पर संयुक्त परिवार
· सीमांत संयुक्त परिवार
· पारंपरिक संयुक्त परिवार
के. एम. कपाड़िया के अनुसार –
1. एक परिवार
2. एक परिवार विवाहित पुत्रों के साथ
3. एक रेखीय वंशज संयुक्त परिवार
4. आश्रित व्यक्ति के साथ वाला एक परिवार
एम. एस. गोरे के अनुसार –
1. संतानीय संयुक्त परिवार
2. भ्रातृक संयुक्त परिवार
3. संतानीय एवं भ्रातृक संयुक्त परिवार
पोलेन कोलेंडा के अनुसार –
परिवार –
1. नाभिक परिवार
2. संपूरक न्यामिक परिवार
3. उप न्यामिक परिवार
4. एक व्यक्ति परिवार
5. संपूरक उप न्यामिक परिवार
संयुक्त परिवार –
1. सगोत्र संयुक्त परिवार
2. संपूरक सगोत्र संयुक्त परिवार
3. वंशज संयुक्त परिवार
4. संपूरक वंशज संयुक्त परिवार
5. वंशज सगोत्र संयुक्त परिवार
6. संपूरक वंशज सगोत्र संयुक्त परिवार
· आदर्श रूप में परिवार एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक शांति गृह है, जहा प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षा पा सकता है. – सदरलैंड और वूडवर्ड
· विवाह द्वारा बंधुता समूहों में सदस्य भर्ती किये जाते है. – लेवी स्ट्रास
· परिवार का क़ानूनी आधार विवाह है. – लूसी मेयर
· विवाह ही नातेदारी व्यवस्था का फाउन्टेनहेड है. – मैलिनोवास्की
· नातेदारी ही सभी प्रकार के सामाजिक संबंधो का मूल स्रोत है. – LH मार्गन
· पुरुष व स्त्रियों के बीच असमानता निजी संपत्ति से शुरू हुयी है. – एंजेल्स
· माता-पिता और उनकी संतान परिवार के तीन आधारभूत स्तम्भ है. – मैलिनोवास्की
· देवर-भाभी विवाह प्रथा सहोदर भाईयों में एकता की अभिव्यक्ति करता है. – मैलिनोवास्की
· परिवार की मुख्य व्याधि एकाकी परिवार का अपने नातेदारी एवं वृद्ध समुदाय से पृथक हो जाना है. – टालकट परसंस
· परिवार और विवाह एक पूरक अवधारणायें है विवाह एक संस्था है, तथा परिवार वह समिति है जिसमे संस्था सम्मिलित होती है. – वेस्टरमार्क
· विवाह यौनाचार को नहीं बल्कि पितृत्व की लाइसेंस प्रदान करता है. – मैलिनोवास्की
· परिवार बृहद सामाजिक संस्था की मौलिक सहयोगी आधारशीला है. – जी पी मरडाक
· हिन्दू समाज की इकाई व्यक्ति न होकर संयुक्त परिवार है. – के एम पणिक्कर
· यंयुक्त परिवार भारत की आदि परंपरा है. – मैक्स मूलर
· जाति और संयुक्त परिवार हिन्दू सामाजिक संगठन के दो महत्वपूर्ण स्तम्भ है. – के एम पणिक्कर
· संयुक्त परिवार का प्रमुख लक्षण पीढ़ियों की गहराई है. – के एम कपाडिया
· परिवर्तनों के कारण संयुक्त परिवार विघटित हो आरहे है. – बर्गेस, डेविस, बोटोमोर
· हिन्दू भावनाएं आज भी संयुक्त परिवार में है. – के एम कपाड़िया
कुछ महत्वपूर्ण पुसके:-
1. Marriage and family in India (1955) – के एम कपाड़िया
2. Hindu kinship (1947) – के एम कपाड़िया
3. Family and kinship: a study of the rural Kashmir (1965) – टी एन मदान
4. Some aspects of family in Mahua (1964) – आई पी देसाई
5. Kinship organization in India (1953) – इरावती कर्वे
6. Hindu society (1961) - इरावती कर्वे
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