सामाजिक नियंत्रण :-
सामाजिक नियंत्रण का प्रयोग सर्प्रथम अमेरिकन समाजशास्त्री . ए. रास
ने अपनी पुस्तक “सामाजिक नियंत्रण – 1901” में
किया है. इन्हें सामाजिक नियंत्रण का जनक कहा जाता है.
· मानव नियंत्रण के कारण ही मानव है – लैंडिस
· समाज का निर्माण सामाजिक संबंधों एवं नियंत्रण की व्यवस्था के द्वारा होता है. – किंग्सले डेविस
· सामाजिक नियंत्रण समाजीकरण की प्रक्रियां का ही विस्तार है. – फिचर
· सामाजिक नियंत्रण समाजीकरण की असफलता को रोकता है. – अगबर्न व निमकाफ
परिभाषाएं :-
- सामाजिक नियंत्रण का तात्पर्य उन सभी शक्तियों से है जिनके द्वारा समुदाय व्यक्ति को अपने अनुरूप बनाता है. – ई.ए. रोंस
- समाजिक नियंत्रण एक प्रक्रियां है जिसके द्वारा सामाजिक व्यवस्था स्थापित की जाति है और बनाये रखें जाती है. – पी.एच. लैंडिस
- सामाजिक नियंत्रण वह सामान्य प्रक्रिया है जिसके द्वारा अपेक्षित व्यवहार और किये गए व्यवहार में अंतर को काम से काम किया जाता है. – टी. परसन्स
- सामाजिक नियंत्रण अपर्याप्त समाजीकरण का प्रतिकारक है. – पी. लेपियर
- सामाजिक नियंत्रण उन विधियों का योग है जिनके द्वारा समाज की व्यवस्था को स्थायी रखने के लिए मानव व्यवहार को प्रभावित करने का प्रयत्न करता है. – कार्ल मैनहीम
- विपथगामी प्रवृत्तियों की काली से फूल बनाने से पहले कुचल देना सामाजिक नियंत्रण है. – टी. परसन्स
- सामाजिक नियंत्रण का सम्बन्ध उन सभी प्रक्रियाओं और प्रयासों से है जिनके माध्यम से समूह अपने आतंरिक तनावों और संबंधो पर नियंत्रण और इस तरह का सकारात्मक कार्यों की तरफ बढ़ता है. – गुरविच और मूर
- सामाजिक नियंत्रण का अर्थ उस तरीके से है जिससे सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था की एकता और उसका स्थायित्व बना रहता है. इसके द्वारा यह समस्त व्यवस्था एक परिवर्तनशील संतुलन के रूप में क्रियाशील रहती है. – मैकाईवर व पेज
- सामाजिक नियंत्रण, सुझाव,अनुनय,प्रतिरोध,उत्पीडन तथा बल प्रयोग जैसे साधनों की वह व्यवस्था है जिसके द्वारा समाज किसी समूह के व्यवहार को मान्यता प्राप्त प्रतिमानों के अनुरूप बनाता है. – गिलिन व गिलिन
सामाजिक नियंत्रण के महत्त्व एवं कार्य :-
- समूह में एकता
- समूह में समरूपता
- सहयोग
- सामजिक सुरक्षा
- व्यवहारों पर नियंत्रण
- परम्पराओं की रक्षा
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