धर्म :- धर्म शब्द संस्कृत के “धृ” धातु से बना है.जिसका
अर्थ होता है धारण करना. आचार व व्यवहार के सामान्य नियमों का पालन करना है.
मनुस्मृति में धर्म के 10 लक्षण बताएं गये है-
धैर्य, क्षमा, दम, स्तेय, पवित्र, इन्द्रिय निग्रह, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध हैं.
धर्म के तीन स्वरूप है-
1. सामान्य धर्म :- मानव धर्म
2. विशिष्ठ धर्म :- शिक्षा ग्रहण करना, दान देना और लेना, यज्ञ कराना और करना, प्रजा की रक्षा करना आदि राजधर्म, प्रजधर्म,मित्रधर्म, पितृधर्म, कुलधर्म, गुरुधर्म, शिष्य धर्म आदि स्वरूप है.
3.
आपद धर्म :- इसे काल धर्म अर्थात विशिष्ठ परिस्थितियों या विपत्तियों में व्यक्ति
अपने निर्धारित धर्म को करने में संशोधन करता है. प्राकृतिक विपत्ति, राष्ट्रिय
विपत्ति आदि .
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