Tuesday, May 16, 2023

Karma's Theory – कर्म का सिद्धांत

 

कर्म का सिद्धांत :- कर्म के सिद्धांत के अनुसार कर्मों का फल हर व्यक्ति को अवश्य ही भोगना पड़ता है. व्यक्ति अपने कर्मों के फल को भोगते हुए असंख्य योनियों से होकर गुजरता है. व्यक्ति अपने पूर्व कर्मों के आधार पर ही मनुष्य जाति का शारीर को प्राप्त करता है और अपने जीवन को भोगता है.

          कर्म की तीन कोटियाँ बताई गयी है –

1.      संचित कर्म :- संचित कर्म का तात्पर्य व्यक्ति के द्वारा पूर्व जीवन में किये गए कर्म से है.

2.      प्रारब्ध कर्म :- व्यक्ति के द्वारा पूर्व जीवन में किये गए संचित कर्मो के आधार पर वर्तमान जीवन में फलों को भोगना.

3.      क्रियामान कर्म :- व्यक्ति के वर्तमान काल के संचित व किये जा रहे कर्मों से है.

 

  • ·    संचित कर्मों का फल जीवन को प्रत्येक दशा में भोगना पड़ता है.
  • ·       प्रारब्ध कर्मों के समाप्ति के साथ ही भौतिक शारीर का अंत हो जाता है.
  • ·       कर्म के सिद्धांत की वृहद् व्याख्या श्रीमद् भागवत गीता में श्री कृष्ण के द्वारा की गयी है. जो वेद व्यास द्वारा रचित है.

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