पुरुषार्थ :- आश्रम व्यवस्था के गृहस्थ आश्रम में चार प्रकार के पुरुषार्थों को बताया गया है.
ये है –
1.
धर्म :- इसमें मनुष्य आत्मसंयम, दयाभाव, उदारता, अहिंसा
आदि गुणों को ग्रहण करता है.
2. अर्थ :- इसमे मनुष्य अपने जीवन को चलाने के लिए धन का उपार्जन एवं उपभोग करता है.
3.
काम :- इसमें मनुष्य संतानोत्पत्ति व पारिवारिक जीवन की निरंतरता रखने के
लिए कार्य करता है.
4.
मोक्ष :- इसमे मनुष्य तीनों पुरुषार्थो के माध्यम से मोक्ष
की प्राप्ति के लिए प्रयास करता है.
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