Thursday, May 18, 2023

Evolutionary Theory - उद्विकासीय सिद्धांत :-

उद्विकास का सिद्धांत :-

    LH मार्गन 1818 - 1881)-

  •     प्राद्यौगिकी परिवर्तन ही विकास है - LH मार्गन
    उद्विकास के तीन स्तर -
      1. जंगली समाज 
      2. बर्बर समाज 
      3. सभ्य समाज 
परिवार का विकास -
  1. समरक्त परिवार 
  2. पुनलुअन परिवार
  3. सिनडेस्मीयन परिवार 
  4. पितृसत्तात्मक परिवार एक विवाही परिवार 
कार्ल मार्क्स (1818 - 1883)-

  •     German Ideology -कार्ल मार्क्स और एंजेल्स 
समाज का विकास -
    1. जनजातीय समाज /एशियाई समाज - वर्ग रहित समाज 
    2. पुरातन / दासत्व समाज - दस व मालिक 
    3. सामंतवादी समाज - सामंत व कृषक दास
    4. पूंजीवादी समाज - पूंजीपति व श्रमिक /मजदूर /सर्वहारा 
    5. साम्यवादी समाज 
हरबर्ट स्पेंसर (1820-1903)

समाज का उद्विकास -
    1. आदिम समाज 
    2. जंगली समाज 
    3. औद्योगिक समाज 
  • सैनिक समाज से औद्योगिक समाज 
  • Simple to Compound 

EB टायलर (1832-1917)-

Book - primitive culture- 1924 

  • धर्म का उदविकासीय सिद्धांत
  • धर्म का विकास आत्मा से हुयी है.
जेम्स फ्रेजर -
धर्म का विकास जादू से हुयी है.

राबर्ट बेलास - के अनुसार धर्म का विकास -

  1. आदिम 
  2. पुरातन
  3. ऐतिहासिक
  4. प्रारंभिक आधुनिक 
  5. आधुनिक 

एडोल्फ कोस्ट (1842-1901)- 

  •     जनांकिकीय उद्विकास का सिद्धांत
बेंजामिन किड (1858-1916)-

  • बुक - Social Evolution
    • धार्मिक उद्विकास का सिद्धांत दिया है.
    • समाज के उद्विकास के पीछे धर्म की भूमिका प्रमुख है.
    • पाश्चात्य देशों में प्रोटेस्टटेंटवाद के कारण ही रजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तन हुआ.
एमाइल दुर्खिम (185 8-1917)-

    • Division of labour in society 
समाज का विकास - 

1.  Ancient society - (यांत्रिक/ सहज/ सरल समाज)                                       
                Mechanical Solidarity                                                

2.  Modern society- (सावयवी/ जटिल/मिश्रित समाज)
                    Organic Solidarity

T.B. Veblen-(18571929)

·      सामाजिक उद्विकास का द्वंदात्मक परिप्रेक्ष्य.

·      समाज का विकासीय क्रम –

1.     शांतिमय जंगली समाज – सामाजिक सहयोग और धर्म की प्रधानता

2.     निम्न बर्बर समाज – संपत्ति की व्यक्तिगत स्वामित्व

3.     उच्च बर्बर समाज – वोलासी वर्ग की उत्पत्ति

4.     आर्थिक समाज – पूंजीवादी, प्रदर्शन उपभोग, नौकरशाही की पराकाष्ठा, नकारात्मक दृष्टिकोण, भौतिकवादी मूल्य प्रभावशाली.

L.T. हाब हॉउस –(1864-1929)

उद्विकास –

1.     जैविक उद्विकास

2.     सामाजिक उद्विक्स

·      आकर, कार्यक्षमता, स्वतान्त्रता और सेवा की पारस्परिकता में वृद्धि होती है तो वह सामाजिक विकास या उद्विक्स कहते है.

·      सामाजिक विकास एवं सामाजिक उद्विक्स एक ही है.

·      सामाजिक विकास/ उद्विकास में तीन तत्व आते है – 

1.      नातेदारी

2.      तानाशाही

3.      नागरिकता

T. परसन्स –(1902-1979)

·      ये प्रकार्यात्मक सामाजिक उद्विकासवादी है.

·      उदविकासीय सार्वभौमिक तत्व –

1.      दृष्टि (Vision)

2.      संचार (Communication)

3.      नातेदारी प्रथा (Kinship)

4.      धर्म (Religion)

5.      नौकरशाही (Bureaucracy)

6.      मुद्रा विनिमय (Money Exchange)

·      समाज का उदविकासीय क्रम –

1.      निम्न आदिम समाज Lower primitive Society

2.      आदिम समाज -

3.      मध्यवर्ती समाज

4.      औद्योगीकृत समाज 



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