- प्राद्यौगिकी परिवर्तन ही विकास है - LH मार्गन
- जंगली समाज
- बर्बर समाज
- सभ्य समाज
- समरक्त परिवार
- पुनलुअन परिवार
- सिनडेस्मीयन परिवार
- पितृसत्तात्मक परिवार एक विवाही परिवार
- German Ideology -कार्ल मार्क्स और एंजेल्स
- जनजातीय समाज /एशियाई समाज - वर्ग रहित समाज
- पुरातन / दासत्व समाज - दस व मालिक
- सामंतवादी समाज - सामंत व कृषक दास
- पूंजीवादी समाज - पूंजीपति व श्रमिक /मजदूर /सर्वहारा
- साम्यवादी समाज
- आदिम समाज
- जंगली समाज
- औद्योगिक समाज
- सैनिक समाज से औद्योगिक समाज
- Simple to Compound
Book - primitive culture- 1924
- धर्म का उदविकासीय सिद्धांत
- धर्म का विकास आत्मा से हुयी है.
- आदिम
- पुरातन
- ऐतिहासिक
- प्रारंभिक आधुनिक
- आधुनिक
एडोल्फ कोस्ट (1842-1901)-
- जनांकिकीय उद्विकास का सिद्धांत
- बुक - Social Evolution
- धार्मिक उद्विकास का सिद्धांत दिया है.
- समाज के उद्विकास के पीछे धर्म की भूमिका प्रमुख है.
- पाश्चात्य देशों में प्रोटेस्टटेंटवाद के कारण ही रजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तन हुआ.
- Division of labour in society
T.B.
Veblen-(18571929)
·
सामाजिक उद्विकास का द्वंदात्मक परिप्रेक्ष्य.
·
समाज का विकासीय क्रम –
1.
शांतिमय जंगली समाज – सामाजिक सहयोग और धर्म की
प्रधानता
2.
निम्न बर्बर समाज – संपत्ति की व्यक्तिगत
स्वामित्व
3.
उच्च बर्बर समाज – वोलासी वर्ग की उत्पत्ति
4.
आर्थिक समाज – पूंजीवादी, प्रदर्शन उपभोग, नौकरशाही
की पराकाष्ठा, नकारात्मक दृष्टिकोण, भौतिकवादी मूल्य प्रभावशाली.
L.T. हाब हॉउस –(1864-1929)
उद्विकास –
1.
जैविक उद्विकास
2.
सामाजिक उद्विक्स
· आकर, कार्यक्षमता, स्वतान्त्रता और सेवा की पारस्परिकता में वृद्धि होती है तो वह सामाजिक विकास या उद्विक्स कहते है.
· सामाजिक विकास एवं सामाजिक उद्विक्स एक ही है.
· सामाजिक विकास/ उद्विकास में तीन तत्व आते है –
1.
नातेदारी
2.
तानाशाही
3.
नागरिकता
T. परसन्स –(1902-1979)
· ये प्रकार्यात्मक सामाजिक उद्विकासवादी है.
· उदविकासीय सार्वभौमिक तत्व –
1.
दृष्टि (Vision)
2.
संचार (Communication)
3.
नातेदारी प्रथा (Kinship)
4.
धर्म (Religion)
5.
नौकरशाही (Bureaucracy)
6. मुद्रा विनिमय (Money Exchange)
· समाज का उदविकासीय क्रम –
1.
निम्न आदिम समाज Lower
primitive Society
2.
आदिम समाज -
3.
मध्यवर्ती समाज
4.
औद्योगीकृत समाज
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