हिन्दू सामाजिक संगठन – वर्ण व्यवस्था , आश्रम
व्यवस्था , पुरुषार्थ , धर्म , कर्म का सिद्धांत , संस्कार
वर्ण व्यवस्था :- वर्ण का अर्थ है – ग्रहण करना / धारण
करना . वर्ण व्यवस्था का वर्णन ऋग्वेद के १०वे मंडल के पुरुष सूक्त में किया गया
है .
जिसमे चार
वर्ण बताएं गए हैं – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और सुद्र
जन्मजात
गुण :- वर्ण
व्यवस्था में तीन जन्मजात गुण बताये गए है – सतोंगुण , रजोगुण , तमोगुण .
ब्राह्मण :- सतोगुण – शुद्ध रूप से सात्विक /धार्मिक प्रवृत्ति
के होते है
क्षत्रिय :- रजोगुण + सतोगुण – ऐश्वर्य एवं शक्ति के साथ – साथ
धार्मिक प्रवृत्ति वाले होते है
वैश्य :- रजोगुण + तमोगुण – धन सम्पदा एवं ऐश्वर्य को अपने जीवन
में प्रधानता देते है, दान – पुण्य में विश्वास करते है
शुद्र :- तमोगुण – विशुद्ध रूप से तामसिक प्रवृत्ति के
होते है.
ब्राह्मण :- सतोगुण
क्षत्रिय :- सतोगुण
(न्यूनतम)+ रजोगुण (अधिकतम)
वैश्य :- रजोगुण
(न्यूनतम)+ तमोगुण (अधिकतम)
शुद्र :- तमोगुण
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